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देश की विषम परिस्थितियों में जनता का सहयोग

28 जुलाई 2026

लेखक: Neelam Jain

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देश की विषम परिस्थितियों में जनता का सहयोग

भारत की आत्मा उसकी जनता में बसती है। जब-जब देश पर विषम परिस्थितियाँ आईं, तब-तब आम जनता ने एकजुट होकर ये साबित किया कि हम केवल 140 करोड़ लोग नहीं, एक परिवार हैं।

कोरोना महामारी में जब अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी हुई, तो जनता ने अपने सिलेंडर दान कर दिए। युवा बाइक पर दवाइयाँ लेकर दरवाजे-दरवाजे पहुँचे। घर में बने मास्क, सेनेटाइजर बाँटे गए। डॉक्टर-नर्स अकेले नहीं थे, उनके साथ पूरा हिंदुस्तान खड़ा था।

बाढ़-सूखा या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा में सेना के साथ-साथ आम नागरिक भी राहत लेकर पहुँचता है। कोई कंबल देता है, कोई चावल-दाल। नदी में फँसे लोगों को बचाने नाव लेकर किसान उतर जाता है। भूखे को रोटी और बेघर को छत देने के लिए जाति-धर्म का भेद मिट जाता है।

सीमा पर सैनिक जब देश की रक्षा करते हैं, तो पीछे माताएँ व्रत रखती हैं, बच्चे चिट्ठियाँ लिखते हैं। किसान अपना अन्न भेजता है। ये सहयोग ही देश की असली ताकत है।

विषम परिस्थिति डरा नहीं सकती जब जनता का दिल एक हो। सरकारें नीतियाँ बनाती हैं, पर देश जनता के सहयोग से ही बचता और बढ़ता है। यही भारत की सच्ची परंपरा है - "वसुधैव कुटुम्बकम"।

पं विनोद गौड़ आयुष

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