मातु वंदना

समय बड़ा अनमोल है, करना मत बेकार।बीता जीवन फिर कभी, मिलता नहीं उधार ।जो करता श्रमदान है,प्राप्त करें हर लक्ष्य,उस पर माँ करती कृपा,भर देती भंडार।। सागर पुत्री आप हैं,नहीं अर्थ की थाह।श्री हरि के उर में बसी,मिटी हृदय की आह।जन-जन का कल्याण कर, करती भव से पार,माँ लक्ष्मी झोली भरें,पूर्ण करें हर चाह।। द्वार … Read more

।।लक्ष्मी के तीन रूप-समृद्धि का सच्चा स्वरूप ।।

राजस्थान की लोक परंपरा में एक सुंदर कहावत प्रचलित है कि समृद्धि, अर्थात् लक्ष्मी, जब भी जीवन में प्रवेश करती है तो तीन रूपों में आती है- माँ, धर्मपत्नी और बेटी ।जिसके जीवन में वह जिस रूप में आती है, व्यक्ति उसी अनुसार उसका उपयोग, सम्मान और विस्तार करता है।1. माँ के रूप में लक्ष्मी … Read more