श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

तन की तरंग ने मन की उमंग ने-

23 जनवरी 2026

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      सोती हुई प्रकृति ने,अंगड़ाई लेते हुए कहा

     हवा ने हँसते हुए आंचल - लहराते हुए कहा

       लो आ गया बसंत देखो छा गया बसंत।


      गुन गुनाती नर्म - नर्म धूप ने नहलाते कहा

      सिहराती छेड़ - छाड़,करती  हवा ने  कहा

       लो आ गया बसंत देखो छा गया बसंत।


    पेड़-पौधों ने कोंपलों से,सज संवर क़र कहा

     खिलखिलाते,सुगंध बिखेरते फूलों ने कहा

       लो आ गया बसंत देखो छा गया बसंत।


         चहचहाती पँख फैला उड़ती गौरैया ने  

  खेतोँ में लहराती इठलाती बसंती सरसों ने कहा 

        लो आ गया बसंत देखो छा गया बसंत.


   तन की तरंगों ने मन की उन्मुक्त उमंगों ने कहा 

      अंबर पर उड़ती, रंग बिरंगी पतंगों ने कहा

       लो आ गया बसंत देखो छा गया बसंत।

-- हेमचंद्र सकलानी, देहरादून

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