श्री देशना संग्रह
माँ शारदा
23 जनवरी 2026
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मधुर तार वीणा के , जब झंकृत होने लगते हैं
, नत मस्तक स्वयं हो जाता है , मोती से आंसू झरते हैं ।
अर्पित करती नन्हा जीवन ,
प्रिय माँ तुम स्वीकार करो ।
मम तुच्छ बुद्धि को ज्योतिर्मय कर,
हृदय में बसो ,मन में रहो ।
हे ! वीणा वादिनी ,मधुर सुगंधित स्नेह सुमन स्वीकार करो ।
अपने आँचल की प्रिय छाँव में,
पनप रहे नन्हे पौधों को ,
ज्ञान के जल से सिंचित कर ,
माँ , वरद हस्त तुम शीश धरो।
जल में , थल में , जो व्याप्त सभी , जड़ को चेतन रूप दिया ।
झंकृत कर , कर्ण प्रिय स्वरों से , नव जीवन का संचार किया।
हंस वाहिनी , सरस्वती ,सुभाषिणी , पुष्प खिले ,बगिया महकी । बसंत बहार सजी जग में ,
तुम्हें शत - शत नमन
वीणा पाणी।
मनवीन कौर पाहवा
