श्री देशना संग्रह
नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस पर श्रद्धा सुमन
23 जनवरी 2026
श्रृंगार लिखूं, गुणगान लिखूं या
चारण बन शाही प्रतिमान लिखूं
थी सुलगी हुई दास्य ज्वाला तब
सुभाष का तेज स्वाभिमान लिखूं
एक ओर गिडगिडाती राजनिति
और धधकती थी अंतस ज्वाला
व्रत अंग्रेजों को दूर भगाने
मन मे संकल्प सिंह ने पाला
वे नर थे नरसिंह गए चढ़ जो
बलिवेदी पी देशभक्ति प्याला
गांधी नेहरू नरम नीति त्याग
कुछ करने निकला वो मतवाला
पथ कण्टक आतंक भगाने को
पुष्प बने सुभाष का गान लिखूं
इतना भर दे अंगार कलम में
मैं क्रांति वीर का बलिदान लिखूं
श्रृंगार लिखूं, गुणगान लिखूं या
चारण बन शाही प्रतिमान लिखूं
थी सुलगी हुई दास्य ज्वाला तब
सुभाष का तेज स्वाभिमान लिखूं
स्वतंत्रता मिल जाय आक्रोश था
जयहिन्द का अमर नाद मुखर था
राष्ट्र युवा शक्ति की शिराऒं मॆं
उष्ण रुधिर वेग प्रवाह प्रखर था
मिली न आज़ादी प्रेम-शांति से
प्रचण्ड उसने यलगार किया था
आज़ादी मिले खून के बदले
बोल बोल तन अंगार दिया था
मेरी कलम को प्रखर धार मिले
भूषण सी लेखन की शान लिखूं
नमन वीर सुभाष तुझे जयहिन्द
बारम्बार हिन्द का गान लिखूं
श्रृंगार लिखूं, गुणगान लिखूं या
चारण बन शाही प्रतिमान लिखूं
थी सुलगी हुई दास्य ज्वाला तब
सुभाष का तेज स्वाभिमान लिखूं
छुप कर भागे और अँग्रेज़ों की
आँखों में धुल जिसने झोंका था
जापान सिंगापुर से ला सेना
खूब ब्रिटिश ताकत को रौंदा था
चला गया, गया नहीं, प्रश्न है
कहाँ गया जो वीर अनोखा था
तथ्य सामने लाने होंगे अब
साजिश हुई या हुआ धोखा था
अश्रु बहा याद करूँ नायक को
अभिमान लिखूं भारत शान लिखूं
नव पीढ़ी करे कर्म ऐसा तब
वीर नेताजी का गुमान लिखूं
शिवा तलवार के मैं वार लिखूं
राणा का भाला अंजान लिखूं
पुकार है वीर सुभाष सा बनो
तो आज तुम्हारा स्तुति गान लिखूं
श्रृंगार लिखूं, गुणगान लिखूं या
चारण बन शाही प्रतिमान लिखूं
थी सुलगी हुई दास्य ज्वाला तब
सुभाष का तेज स्वाभिमान लिखूं
सुरेश चौधरी
