श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

मेला

15 अप्रैल 2020

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मेला

 

यह दुनिया एक मेला है

ज़िंदगी दो दिन का खेला है

इंसान जग में आया अकेला

अकेले ही उसे चले जाना है

 

कैसा अहं, यह कैसी खुद्दारी

फिर मैं-मैं की कैसी मारा-मारी

अपना नहीं जग में साथी-संगी

अंत समय मिट्टी में मिल जाना है

 

स्व-पर,राग-द्वेष में उलझ मानव 

नष्ट करता हीरे-सा अनमोल जीवन

माया-मोह में फंस खुद पर इतराता

जबकि मुट्ठी-भर राख उसकी कहानी है

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दुनिया फॉनी

 

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