श्री देशना
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श्री देशना संग्रह

कुण्डलियाँ

1 दिसंबर 2025

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गरम कोट कहने लगें, ठंडी बड़ी प्रचंड ।

बोली फटी कमीज है, दो मुट्ठी भर ठंड ।

दो मुट्ठी भर ठंड, देखिए काँख दबाए ।

लकड़ी लाए बीन, द्वारे अलाव जलाए।

सोते डाल पुआल, ठंडी भी है बेशरम ।

उनसे रहती दूर, रहते जो कमरे गरम ॥


डॉ. पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

सहायक आचार्य, हिन्दी विभाग 

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश)


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